बैंगलोर मैढ़ क्षत्रिय स्वर्णकार समाज Bangalore Maidh Kshaytriya Swarnkar Samaj (R.)

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Emblem of the Bangalore Maidh Kshatriya Swarnkar Samaj with traditional symbols and inscriptions.
Traditional artwork of Maharaja Shree Ajmeedh Ji with attendants and royal throne.
Main Advertisement with contact email on a marble background.

BMKSS - Bangalore Maidh Kshaytriya Swarnkar Samaj

विकास की ओर अग्रसर बैंगलोर मैढ़ क्षत्रिय स्वर्णकार समाज

बैंगलोर मैढ़ क्षत्रिय स्वर्णकार समाज आज सम्पूर्ण विश्व में स्वर्णकार समाज का स्वर्ण मुकुट है जिसमे एक से बढ़कर एक प्रतिभावान सदस्य है जिन्हे हीरा, मोती, माणिक, इत्यादि नामो से पुकारा जाये तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। स्वर्णकार समाज के अन्य संगठन होते हुए भी बैंगलोर मैढ़ क्षत्रिय स्वर्णकार समाज ग्रुप की जरूरत है क्योंकि स्वर्णकार समाज में जनसंख्या वृद्धि के साथ ही उनकी सामाजिक ,सांस्कृतिक और आर्थिक जरूरतों की पूर्ति के लिए व्यापक सहयोग की आवश्यकता है।
बैंगलोर मैढ़ क्षत्रिय स्वर्णकार समाज, स्वर्णकार परिवारों के लिए एक ऐसा सामाजिक मंच है जहां स्वर्णकार मूल्यों, संस्कृतियों और परंपराओं को सुरक्षित करने व बढ़ावा देने के लिए , स्वर्णकार पीढ़ियों के बीच मजबूत बंधन बांधने के लिए एवं सभी स्वर्णकार परिवारों के बीच विचारों ,विशेषताओं और अनुभव का आदान प्रदान करने के लिए विभिन्न स्थान पर रहने वाले स्वर्णकार परिवारों के बीच पुल निर्माण करने का कार्य होगा ।
बैंगलोर मैढ क्षत्रिय स्वर्णकार समाज ग्रुप में सक्रिय रुप से जुड़कर आप हर तरह की सांस्कृतिक, सामाजिक गतिविधियों में भाग ले सकेंगे। व्यक्तिगत संपर्क का निर्माण एवं प्रसार कर सकेंगे । विवाह योग्य युवक-युवतियों का आसानी से पता लगा सकेंगे । पारिवारिक विवरणिका में किसी भी क्षेत्र में रहने वाले परिवार की जानकारी नाम या गौत्र अथवा व्यवसाय से मिल सकेगी । समाज में किसी तरह का कोई भी कार्यक्रम होगा उस बारे में संयोजक उसकी सूचना इवेंट में कर सकेंगे । इसके साथ ही कोई भी सदस्य किसी भी तरह से कोई सामाजिक एक्टिविटी करते है तो वह भी न्यूज़ में अपनी एक्टिविटी को भेज सकते है जिसकी जानकारी ग्रुप से जुड़े हुए समस्त सदस्य तक पहुंच जाएगी ।
पारिवारिक पिकनिक , यात्रा ,मनोरंजन एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का लाभ उठा सकेंगे। ग्रुप में प्रतिभाओं का सम्मान होगा ,कैरियर निर्माण में सहयोग होगा । शिक्षा , स्वास्थ्य आदि महत्वपूर्ण क्षेत्र के व्यक्तियों से मिलकर एक दूसरे के लिए सहयोग कर सकेंगे। 

व्युत्पत्ति

 

 सुनार शब्द मूलत: संस्क

विकास

 

 स्वर्णकार समाज 

मैढ़ क्षत्रिय स्वर्णकार समाज

स्वर्णकार जाति का इतिहास

स्वर्णकार – भारत के स्वर्णकार समाज से सम्बन्धित जाति है जिनका मुख्य व्यवसाय स्वर्णधातु से भाँति-भाँति के कलात्मक आभूषण बनाना है। यह समाज हिन्दू धर्म को मानने वाला है। मूलत: क्षत्रिय वर्ण में आते हैं इसलिये क्षत्रिय स्वर्णकार भी कहलाते हैं।

श्री मैढ़ क्षत्रिय स्वर्णकार समाज एक ऐसा गौरवशाली समाज है जो परंपराओं में गहराई से जड़ें रखता है और एकता, सेवा, और उत्कृष्टता के मूल्यों से प्रेरित है। सदियों पुरानी विरासत के साथ, हमारा समाज उन व्यक्तियों का समूह है जिन्होंने कारीगरी, नेतृत्व और परोपकार के माध्यम से समाज में अपार योगदान दिया है।

समय के साथ, यह समुदाय एक प्रगतिशील संगठन के रूप में विकसित हुआ है, जो प्रगति को अपनाते हुए अपनी सांस्कृतिक धरोहर के प्रति सच्चा बना हुआ है। हमारे सदस्य शिक्षा को बढ़ावा देने, सांस्कृतिक संरक्षण को प्रोत्साहित करने, और सभी के लिए सामाजिक कल्याण सुनिश्चित करने के लिए समर्पित हैं।

स्वर्णकार शब्द की व्युत्पत्ति

सुनार शब्द मूलत: संस्कृत भाषा के स्वर्णकार का अपभ्रंश है जिसका अर्थ है स्वर्ण अथवा सोने की धातु का काम करने वाला। प्रारम्भ में निश्चित ही इस प्रकार की निर्माण कला के कुछ जानकार रहे होंगे जिन्हें वैदिक काल में स्वर्णकार कहा जाता होगा। बाद में पुश्त-दर-पुश्त यह काम करते हुए उनकी एक जाति ही बन गयी जो आम बोलचाल की भाषा में सुनार कहलायी।  

स्वर्णकार समाज

स्वर्णकार समाज का इतिहास वैदिक काल तक जाता है। प्राचीन ग्रंथों और राजदरबारों में स्वर्णकारों का विशेष स्थान था। राजा-महाराजा इनके द्वारा बनाए गए आभूषणों और मुद्राओं का प्रयोग करते थे। मंदिरों की मूर्तियों एवं धार्मिक आभूषणों के निर्माण में भी इनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। 

स्वर्णकार समाज ने भारतीय संस्कृति को समृद्ध बनाने में बड़ा योगदान दिया है। विवाह, त्योहार और धार्मिक अनुष्ठानों में प्रयोग होने वाले पारंपरिक आभूषण इसी समाज की कला का उदाहरण हैं। इनकी कारीगरी धैर्य, सटीकता और सौंदर्य-बोध का प्रतीक मानी जाती है। 

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बैंगलोर मैढ़ क्षत्रिय स्वर्णकार समाज

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